पटना (उमाशंकर त्रिपाठी):- भारत में लोकसभा चुनाव समाप्त हो चुके हैं और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 तारीख को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली थी बिहार मंत्री परिषद में आज एक बार फिर विस्तार किया गया और 8 नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर बिहार की जनता और जेडीयू को खुश करने की कोशिश की गई है मंत्रिमंडल विस्तार में भारतीय जनता पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली है

जेडीयू ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में खुद को शामिल करने से अलग कर लिया था और जिसके बाद यह कयास लगाने शुरू हो गए थे कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी को केंद्रीय कैबिनेट में सिर्फ एक सीट मिलने से ही नाराज हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय समीकरण का खास ख्याल रखा है इससे पहले 75% चेहरे पिछड़े समाज से आते हैं जिन 8 लोगों को मंत्री बनाया गया है इसमें चार पहली बार मंत्री बने हैं जबकि चार पहले मंत्री रह चुके हैं

अपने प्रिय पाठकों को बता दे कि बिहार मंत्रिमंडल में विस्तार आज किया गया है और जेडीयू ने जिन आठ मंत्रियों को शपथ दी है उनमें सबसे बड़ा चेहरा श्याम रजक दलित समाज से आते हैं जेडीयू प्रवक्ता नीरज सिंह भुमिहार समाज से आते हैं कांग्रेस से जेडीयू में आए अशोक चौधरी दलित समाज से आते हैं राम सेवक कुशवाहा कोइरी समाज से आते हैं नरेंद्र नारायण यादव यादव समाज से आते हैं संजय झा ब्राह्मण समाज से आते हैं लकेश्वर राय अति पिछड़ा और बीमा भारती अति पिछड़ा समाज से आती है

आपको यह भी बता दें कि बिहार मंत्रिमंडल में अभी भी तीन ऐसे पद खाली पड़े हैं इनमें से जेडीयू से एक बीजेपी से एक और एलजेपी के कोटे में से एक मंत्री पद की कुर्सी अभी तक खाली पड़ी है और ऐसे में अब यह संभावना जताई जा रही है कि बिहार मंत्रिमंडल में फिर से विस्तार किया जा सकता है नीतीश कुमार ने कैबिनेट का विस्तार 23 महीनों के बाद किया है लेकिन मोदी के मंत्री मंडल में जेडीयू को जगाना मिलने से कहीं ना कहीं रिश्तो में खटास साफ झलक रही है और मोदी सरकार में शामिल होने से मना करने वाले नीतीश का कैबिनेट विस्तार आज भारतीय जनता पार्टी को यह जता गया कि जेडीयू बिहार में अपना राज कर रही है