नई दिल्ली (उमाशंकर त्रिपाठी):- उत्तर प्रदेश की सियासत में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब बहुजन समाजवादी पार्टी की मुखिया मायावती ने बुधवार को आगामी लोकसभा चुनाव के अंदर चुनाव ना लड़ने का फैसला कर लिया और उसमें मायावती ने कहा कि गठबंधन को जिताना जरूरी है ना कि खुद को जिताना जरूरी है गठबंधन जीतेगा तो सब जीतेंगे मायावती ने कहा कि वह जब चाहे लोकसभा का चुनाव जीत सकती है और उनका गठबंधन उत्तर प्रदेश के अंदर आज बेहतर स्थिति में है लेकिन वह लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे और आगे जरूरत पड़ने पर वह किसी भी सीट के ऊपर चुनाव लड़ सकती हैं और आपको बता दें कि चुनाव ना लड़ने का ऐलान करने के कुछ ही घंटे के बाद ही उन्होंने यह बात भी बताएं कि मुख्यमंत्री या मंत्री बनने के 6 महीने के भीतर लोकसभा और राज्यसभा का सांसद बना होता है तो अब ऐसे में एक बड़ा सवाल जी उठने लगा है क्या मायावती देश का प्रधानमंत्री बनने का प्लान तैयार कर रही है और उसके ऊपर काम चल रहा है

बहुजन समाजवादी पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने ट्विटर के ऊपर लिखा जिस प्रकार 1995 में जब मैं पहली बार उत्तर प्रदेश की सीएम बनी थी तब मैं उत्तर प्रदेश के किसी भी सदन का सदस्य नहीं थी ठीक उसी प्रकार केंद्र में भी पीएम मंत्री को 6 महीने के भीतर लोकसभा राज्यसभा का सदस्य बना होता है इसीलिए अभी मेरे लिए चुनाव लड़ने के फैसले से लोगों को कतई मायूस नहीं होना चाहिए

उत्तर प्रदेश के अंदर समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव के साथ गठबंधन कर के उत्तरी मायावती ने बुधवार को एक बड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि वर्तमान हालात के मद्देनजर अगर चुनाव के बाद मौका आया तो मैं जिस सीट से चाहो उस सीट को खाली करके लोकसभा के सांसद बन सकती हैं इसीलिए देश के वर्तमान हालात को देखते हुए तथा अपनी पार्टी की पूरी मूवमेंट के व्यक्तिगत हित के लिए जनहित व देश हित का कोई भी यह तकाजा नहीं है कि मैं लोकसभा का चुनाव अभी ना लड्डू यही कारण है कि मैंने फिलहाल लोकसभा चुनाव ना लड़ने का निर्णय लिया है

आपको बता दें कि बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रमुख मायावती ने यह भी कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में 4 बार लोकसभा चुनाव जीता है तथा दो बार उत्तर प्रदेश के अंदर विधानसभा की सदस्य रही है और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रही हैं और ऐसी स्थिति में अगर मायावती को उत्तर प्रदेश में किसी भी सीट के ऊपर केवल अपना नामांकन भरने के लिए जाना होगा और बाकी सीटों की जिम्मेदारी उनके लोग खुद अपने कंधों पर उठा लेंगे यह निश्चित है और इसके साथ ने यह भी कहा कि अगर चुनाव लड़ेगी तो पार्टी के लोग उनके लाख मना करने के बावजूद उनके लोकसभा क्षेत्र में काम करने जाएंगे जिससे दूसरे निर्वाचित चित्रों में चुनाव का प्रभाव होने की आशंका है पार्टी मोमेंट के हित में ऐसा कतई मायावती नहीं चाहती है

बहुजन समाजवादी पार्टी की सुप्रीमो मायावती के चुनाव नहीं लड़े जाने और खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ में रखने का संकेत देने की पाट भूमि के अंदर कांग्रेस ने बुधवार को यह बात सबके सामने कहीं की 2019 में सरकार उनके नेतृत्व में बनेंगे और जिन दलों के साथ मतभेद दिखाई दे रहे हैं वह सब दल भी कांग्रेस पार्टी के साथ ही होंगे और वही कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी यह कहा कि जहां तक किसी व्यक्ति विशेष का चुनाव लड़ने या लड़ाए जाने का प्रश्न है मुझे यह लगता है कि यह उनका अपना निर्णय है वह एक अलग पार्टी है और वह उस पार्टी की मुखिया है और इसलिए हम उनके ऊपर कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहते

इसके बाद एक और सवाल पूछे जाने पर कि क्या चुनाव नहीं लड़ने के कारण मायावती प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गई है तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि आप विराम रखें कांग्रेस के नेतृत्व में 2019 में भारत के अंदर सरकार कांग्रेस पार्टी की बनेगी और बहुत सारे साथी जो हैं जिन्होंने आपको आज लगता है कि थोड़ा बहुत मत भेजा वह सब एक साथ फिर एक मंच के ऊपर आप सब को इकट्ठे नजर आएंगे