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India-Nepal Tension: नेपाल ने एक और दावा ठोका, अगर यह बांध ना बना बाढ़ आने की स्थिति में बिहार के हालात हो जाएंगे गंभीर

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Nepal caused major trouble for India
Photo credit Twitter : IndiaInNepal

पटना बिहार ( उमाशंकर त्रिपाठी

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) 22 जून 2020:- भारत में जहां एक तरफ चीन और भारत का विवाद सीमा पर बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ भारत और नेपाल के बीच में भी अब रिश्ते कुछ अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं. लिपुलेख, कालापानी व लिंपियाधुरा के सीमा विवाद के ऊपर नए मामलों में नेपाल और भारत के बीच तनाव बढ़ चुका है. दोनों देशों में एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है.

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नेपाल ने बिहार के चंपारण क्षेत्र स्थिति एक बांध की मरम्मत पर रोक लगा दी गई है वहां के 500 मीटर भूखंड पर नेपाल ने अपना दावा ठोक दिया है. यह नेपाल से आने वाली लालबकेया नदी (Red Bakaya River) पर पहले से ही है और इस बड़ी घटना के बाद जहां भारत और नेपाल के बीच एक बार फिर से बड़ा तनाव पैदा हो गया है.

नेपाल की तरफ से बिहार के अंदर पूर्व चंपारण के ढाका अनुमंडल स्थित बलुआ गुआबारी पंचायत के बिल्कुल नजदीक लालबकेया नदी (Red Bakaya River) पर बांध की मरम्मत के पूरे काम को रोक दिया गया है. नेपाल का अब यह कहना है कि यह बांध उसकी जमीन के अंदर बनाया जा रहा है. नेपाल की इस हरकत के बाद बिहार के सिंचाई विभाग ने भारतीय क्षेत्र के अंदर अपना पूरा काम रोक दिया है.

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पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन की तरफ से घटना की जानकारी नेपाल के अंदर भारतीय महावाणिज्य दूतावास सहित साहित्य केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार को सारी जानकारी दे दी गई है. बांध की मरम्मत कर रहे सिंचाई विभाग के द्वारा जारी बयान के अंदर इंजीनियर बब्बन सिंह ने मीडिया को बताया कि लालबकेया नदी का पश्चिमी बांध 2017 के दरमियान आई बाढ़ से टूट गया था.

इसकी मरम्मत पर नेपाल की तरफ से आपत्ति जताई जा रही है. जिसके बाद एहतियात के तौर पर इस पूरे काम को बंद कर दिया गया है. बांध बनकर तैयार हो जाए तो पूर्वी चंपारण जिले के ढाका और पताही के अंदर बाढ़ की रोकथाम को करना पूरी तरह से संभव होगा।

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भारत ने सशस्त्र सीमा बल व पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन के अनुसार यह विवाद भारत नेपाल सीमा पर पिलर संख्या 345/5 और 345/7 के बीच के 500 मीटर के अंदर जो बड़े भूखंड आए उसको लेकर है. नेपाल बांध को लेकर अब एक नई आपत्ति जता रहा है. भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच बातचीत से यह मामला सुलझ जाता लेकिन इस बार दोनों देशों के बीच बढ़ रहे तनाव को देखते ऐसा संभव होता नजर नहीं आ रहा.

सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों का यह भी मानना है कि बांध के विवाद को नेपाली सशस्त्र सीमा पर प्रहरी है, सीमा पार के नेपाली नागरिक जानबूझकर उलझा रहे हैं, नेपाल के ग्रामीणों ने एस एस बी के साथ भी दुर्व्यवहार किया है, इसी बीच बांध की मरम्मत पर रोक लगने के बाद सीमाई इलाकों के लोग बहुत ज्यादा डर चुके हैं.

बलुआ गुआबारी के पूर्व सरपंच मोहम्मद जुल्फिकार आलम अब यह मानते हैं कि नेपाल के साथ भारत का सदियों पुराना सामाजिक सांस्कृतिक संबंध रहा है. दोनों देशों की सीमाएं भी खुली रही हैं. अगर ऐसे में संबंधों के अंदर तनाव आ जाते हैं और बांध की मरम्मत पर संपूर्ण रोक लग जाती है तो ऐसे में यह माना जा सके कि रोक के पीछे कोई बड़ी विदेशी शक्ति का हाथ हो सकता है.

सवाल यह उठता है कि भारत और नेपाल के बीच असल में विवाद किस बात का है. ब्रिटिश शासन के दौरान साल 1816 के अंदर बिहार के पूर्वी चंपारण के सुगौली में भारत और नेपाल के बीच एक बड़ी संधि हुई थी. जिसके अंसुगौधी की संधि कहते हैं. इस संधि से दोनों देशों की सीमाएं तय होती हैं और इस संधि के मुताबिक ब्रिटिश शासकों ने काली नदी की उत्पत्ति स्थल को भारत और नेपाल की सीमा पर तय किया गया था. जिसे लेकर दोनों दोनों देशों की राय अलग-अलग है. नदी के उद्गम स्‍थल को लेकर भारतीय क्षेत्र लिपुलेख, कालापानी व लिंपियाधुरा पर नेपाल अपना दावा कर रहा है। दोनों देशों के बीच के इस कार्टोग्राफिक विवाद ने नेपाल में उग्र राष्ट्रवाद को बढ़ा दिया है।

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