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बाबा रामदेव पतंजलि की बढ़ी मुश्किलें, लाइसेंस लेते समय उन्होंने COVID-19 का जिक्र ही नहीं किया

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Baba Ramdev Patanjali's difficulties increased
Photo : Acharya Balkrishna twitter

नई दिल्ली (उमाशंकर त्रिपाठी) 24 जून 2020:- योग गुरु बाबा रामदेव ने कल कोरोनावायरस की आयुर्वेदिक दवाई बनाने की बात कही है. जिसके चलते कल एक बड़ा कार्यक्रम भी रखा गया. योग गुरु बाबा रामदेव और उनकी करोना वायरस के इलाज के लिए बनाई गई इस दवाई की अब धीरे-धीरे मुश्किलें बढ़ती चली जा रही हैं.दरअसल पतंजलि आयुर्वेद ने लाइसेंस

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के लिए आवेदन करते समय इस बात की कोई जानकारी नहीं दी थी कि वह कोरोना के उपचार के लिए दवाई तैयार कर रहे हैं. एक लाइसेंस के अधिकारी ने इस बात को बताया कि हर्बल उत्पादन बनाने वाली पतंजलि कंपनी के पास सिर्फ इम्युनिटी बूस्टर, खांसी और बुखार की दवाई का लाइसेंस है.

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आपको बता दें कि मंगलवार के दिन पतंजलि ने “कोरोनिल और स्वासरी” दवाओं के साथ करोना किट लॉन्च कर दिए. रामदेव का दावा है कि ट्रायल के दौरान उन्होंने 100 फ़ीसदी रिजल्ट इस दवाई से लिया है. हालांकि लांच किए जाने के तुरंत बाद सरकार ने पतंजलि से यह बात कही कि वह दवाई का विज्ञापन ना करें. जब तक की दवाई का परीक्षण पूरी तरह से नहीं हो जाता.

आयुष मंत्रालय ने पतंजलि से यह भी कहा है कि वह उन चीजों की सभी जानकारी सरकार को दें. जिससे कि दवा तैयार की गई है. इसके अलावा शोध के नतीजे भी आयुष मंत्रालय को देने के लिए कहा गया है. वे अस्पताल जहां शोध किया गया क्या कंपनी ने इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी से क्लियरेंस लिया था. क्या क्लीनिकल ट्रायल के लिए रजिस्टर्ड किया गया था. यह सब जानकारी आयुष मंत्रालय ने पतंजलि से मांगी गई है.

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केंद्र ने उत्तराखंड सरकार से दवा की जानकारी और लाइसेंस की कॉपी भी मांगी है. उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग के लाइसेंस अधिकारी वाईएस रावत ने इस बात की जानकारी दी है कि पतंजलि के आवेदन पर हमने इनको लाइसेंस दिया था हालांकि कंपनी ने करोना का कहीं भी जिक्र इस बात में नहीं किया था. सिर्फ इम्यूनिटी बूस्टर खांसी और बुखार के लिए लाइसेंस हमसे मांगा गया था. हमने उन्हें नोटिस जारी करने की उनको किट बनाने की अनुमति किसने दी.

मामले के अंदर आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने इस बात को कहा है कि एक अच्छी बात है कि योग गुरु बाबा रामदेव ने देश को एक नई दवा दी है. लेकिन इसके लिए आयुष मंत्रालय से उनको अनुमति लेनी जरूरी थी. उन्होंने पुष्टि की पतंजलि ने दवाओं के संबंध में दस्तावेज कल ही आयुष मंत्रालय को भेजे हैं. श्रीपद नाईक ने इस बात को भी कहा है कि कोई भी दवाई बना सकता है जो कोई भी दवा बनाना चाहता है उस व्यक्ति को आयुष मंत्रालय के टास्क फोर्स के नियमों के अंदर से गुजरना पड़ता है.

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सभी को आयुष मंत्रालय को पुष्टि के लिए अनुसंधान का विवरण भी भेजना पड़ता है. यह नियम है और कोई भी इसके बिना अपने उत्पादों का विज्ञापन कहीं भी सार्वजनिक नहीं कर सकता. तो अब यह कहा जा सकता है कि बाबा रामदेव की यह दवा कहीं ना कहीं बड़ी मुश्किलों में फंसने वाली है और उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस दवाई की जांच बहुत अच्छे ढंग से करेगी.

उसके बाद ही अपना फैसला लेगी लेकिन इसी के चलते अब कई लोगों ने दवाई बनाने को लेकर बाबा रामदेव को ट्रोल करना भी शुरू कर दिया है.

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