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100 सालों से चली आ रही भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा इस साल नहीं होगी, विश्व हिंदू परिषद ने कोर्ट से यह अपील की है

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Lord Jagannath Rath Yatra postponed
Photo credit Twitter : Lord Jagannath

नई दिल्ली ( 21 जून 2020)

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:- विश्व हिंदू परिषद (vhp) के द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की गई है. कि वह पिछले हफ्ते के अपने उस आदेश पर फिर से विचार करें। जिसमें कोरोनावायरस के प्रसार को देखते हुए पूरी (Puri) के अंदर रथ यात्रा का कार्यक्रम जिस पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस का सहयोगी संगठन ओडिशा के इस प्रसिद्ध कार्यक्रम को रद्द ना किए जाने के खिलाफ बहुत ही मजबूती के साथ प्रयास करता जा रहा है. ऐसा काम उस वक्त हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने उन आदेशों को जारी किया।

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जिसमें रथयात्रा को पूरी तरह से रोकने की बात कही थी इसके बाद इस भव्य धार्मिक कार्यक्रम से जुड़ी सभी गतिविधियों के ऊपर संपूर्ण रोक लगा दी गई थी और इस रथयात्रा के अंदर दुनिया भर से लोग जुटते हैं. विश्व हिंदू परिषद के महासचिव मिलिंद परांडे ने रविवार के दिन यह बात कही है. पूरी कि यह पारंपरिक सालाना भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा जो पिछले करीब 100 सालों से लगातार निर्विघ्न चलती जा रही है. उसे इस साल भी आयोजित होना चाहिए।

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रथ यात्रा का आयोजन 30 जून के दिन किए जाना था. इसे मुद्दा बनाते हुए विश्व हिंदू परिषद ने सुलझाया है कि भरत को संकेतक तौर पर रथ को हाथियों, मशीनों आदि से खींचा जाना चाहिए। इसके अलावा मंदिर के अंदर काम करने वाले पूरी तरह से स्वस्थ और कोविड-19 टेस्ट में नेगेटिव पाए जाएंगे तो ही इस रथयात्रा के अंदर वह लोग शामिल हो सकते हैं.

महासचिव मिलिंद परांडे ने अपने एक बयान के अंदर यह बात बताई है कि कोविड-19 महामारी संकट के खिलाफ सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रोटोकाल के साथ इस रथयात्रा को पवित्र बड़ा दांडा (ग्रैंड एवेन्यू) के अंदर करवाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यात्रा की सालाना निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कोई रास्ता खोजना पड़ेगा।

आज की परिस्थितियों में मैं शायद ही यह बड़ी उम्मीद की जा सकती है कि इस रथयात्रा के अंदर एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु जुटेंगे। उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट को एक बार फिर से इस फैसले के ऊपर समीक्षा करने की आगरा विनती की गई है.

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गुरुवार के दिन मुख्य न्यायाधीश एमएस बोबडे ने यह बात कही है कि यहां तक कि भगवान जगन्नाथ शीर्ष अदालत को माफ नहीं करेंगे। अगर उन्हें कोविड-19 के मामलों के बीच इस कार्यक्रम की अनुमति दे दी. घातक महामारी से अब तक भारत देश के अंदर 13,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.

अदालत ने यह भी कहा है हम यह निर्देश दे रहे हैं कि इस वर्ष उड़ीसा के मंदिर, शहर या राज्य के किसी भी अन्य हिस्से में कहीं भी कोई भी रथयात्रा का प्रोग्राम नहीं किया जाएगा हम यह निर्देश देते हैं कि इस अवधि के दौरान रथ यात्रा से जुड़ी कोई भी धर्मनिरपेक्षता या धार्मिक गतिविधियों इस दौरान नहीं होंगी। तो अब यह कहा जा सकता है कि 100 सालों से चली आ रही यह रथ यात्रा इस साल माननीय कोर्ट ने स्थगित कर दी है।

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