The alliance between Akhilesh and Mayawati is fixed, but there are 5 big challenges in front of both.

लखनऊ (उमाशंकर त्रिपाठी):- आज से 24 साल पहले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सियासत के अंदर अपनी ताकत को सपा के साथ जोड़कर दमखम दिखाया था और वह दमखम देखने के बाद अब ऐसा ही कुछ फिर से उत्तर प्रदेश की सियासत में देखने को मिल रहा है और यह दोनों पार्टियां एक बार फिर से इकट्ठा होने जा रही हैं और अब इनके इकट्ठे होने का मकसद है भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनाव के अंदर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी टक्कर देने के लिए तैयार हैं और इसीलिए अखिलेश यादव और मायावती एक साथ एक मंच के ऊपर जल्द नजर आएंगे

जानकारों की बात कि माने तो इन दोनों बड़े दलों का वोट बैंक दलित समाज पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम वर्क है और भारतीय जनता पार्टी के लिए यह एक बड़े खतरे की घंटी है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी की शोहरत पर मुख्यमंत्री के काम पर भरोसा और वह पिछले पिछड़े वर्ग और दलित वोटरों को लुभाने के लिए काफी कोशिश करने में लगे हुए हैं और इस बड़े वोट बैंक को भारतीय जनता पार्टी अपनी तरफ करने में लगी हुई है और इसके अलावा भी भारतीय जनता पार्टी को गठबंधन की काट के लिए कोई जतन की जरूरत नहीं है

और इस बार लोकसभा के इस चुनावी जंग के अंदर समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और बहुजन समाजवादी पार्टी की मायावती एक साथ एक मंच के ऊपर नजर आएंगे जैसे कि पिछले चुनाव में कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव एक साथ एक मंच के ऊपर नजर आए थे चुनाव नतीजों चुनाव के नतीजे इस बात के ऊपर भी निर्भर करते हैं कि दोनों दलों की मिलीजुली ताकत भारतीय जनता पार्टी के ऊपर भारी पड़ सकती है और पिछले लोकसभा चुनाव के अंदर भारतीय जनता पार्टी ने जहां पूरे उत्तर प्रदेश के अंदर 71 सीटें जीत कर सब को चौंका दिया था लेकिन वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी को मिला वोट प्रतिशत भी करीब उतना ही है जितना कि भारतीय जनता पार्टी को मिला था यह तब है जब कांग्रेस व रालोद का वोट इसमें शामिल नहीं है तो 2017 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 312 सीटों सीटें जरूर जीती उत्तर प्रदेश जीत कर पूरे उत्तर प्रदेश में जीत का पंचम जरूर लहराया था लेकिन समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी का वोट भारतीय जनता पार्टी से ही आ रहा है और समाजवादी पार्टी 403 की बजाय 311 सीटों के ऊपर ही लड़ी

1 उत्तर प्रदेश के अंदर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के लिए गठबंधन को बड़ी चुनौतियां भी हैं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी का जिस वृक्ष के मुख्य जनाधार है उसे अब एक साथ लाना तो मुश्किल है दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को इसके लिए तैयार करना पड़ेगा क्योंकि यह अब तक एक दूसरे के खिलाफ ही लड़ते रहे सबसे बड़ी मुश्किल तो यह है
2 सीटें बट जाने के बाद टिकट के दावेदारों के असतो असतो असंतोष को शांत करना एक बड़ी चुनौती रहेगी दोनों दलों की बात करें ऐसे कद्दावर नेता बागी होकर उनके खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं या फिर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं और वही लोग समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के इस गठबंधन के लिए बढ़ी मुश्किलें बन जाएंगे
3 बहुजन समाजवादी पार्टी ने फूलपुर गोरखपुर व्यक्त कैराना के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को खुलकर समर्थन देकर यह साबित कर दिया कि उनका वोट आसानी से ट्रांसफर हो जाता है लेकिन अब समाजवादी पार्टी को भी यह साबित करना पड़ेगा कि पिछले विधानसभा के अंदर समाजवादी पार्टी कांग्रेस के शासकीय गठबंधन के अंदर यह सबसे बड़ी मुश्किल देखने को मिली थी

3 गठबंधन को मजबूत करना है और मजबूत करने के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी को कांग्रेस पार्टी और लाल रालोद को भी समर्थन में लाना होगा क्योंकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी दोनों एक हो कर के इस पूरे चुनाव को नहीं जीत सकते भारतीय जनता पार्टी ज्यादा सीटों का लालच देकर रालोद को अपने साथ ला सकती है

4 मुस्लिम बहुल सीटों के ऊपर ध्रुवीकरण की स्थिति में गठबंधन के मुकाबले भारतीय जनता पार्टी को ज्यादा फायदा मिल सकता है

5 और आपको यह भी बता दें कि उत्तर प्रदेश के अंदर भारतीय जनता पार्टी को करारी हार देने के लिए अब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के बीच बंटवारे में सीटें तय होना अभी बाकी है लेकिन दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर तस्वीर अभी तक पूरी तरह साफ हो चुकी है समाजवादी पार्टी बदायूं, कन्नौज, मैनपुरी और फिरोजाबाद जैसी सीटिंग सीट ए तो लड़ेगी ही क्योंकि उपचुनाव में जीती फूलपुर, गोरखपुर भी समाजवादी पार्टी सीट जरूर लड़ेगी और इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी द्वारा जीती इटावा, बलिया, मुरादाबाद, रामपुर, कराना वह संभल सीट के ऊपर समाजवादी पार्टी के पास जाना है और वही मथुरा बागपत रालोद के खाते में जा सकती है और अमेठी, रायबरेली कांग्रेस के लिए छोड़ी गई है बहुजन समाजवादी पार्टी सपा की सेटिंग आजमगढ़ पर लड़ने की इच्छा है

सूत्रों की माने तो बहुजन समाजवादी पार्टी आजमगढ़ सीट समाजवादी पार्टी से ले सकती है और इसके इलावा बहुजन समाजवादी पार्टी सुरक्षित सीटों से बड़ा हिस्सा चाहती है बहुजन समाजवादी पार्टी पश्चिमी यूपी की आगरा बिजनौर सहारनपुर तो खासतौर पर लड़ेगी ही लड़ेगी इसके अलावा बाकी हिस्से की लालगंज, मिश्रिख, अम्बेडकरनगर, मछलीशहर, संतकबीर नगर, भदोही, बस्ती, बाराबंकी, कौशाम्बी व बांसगांव लड़ेगी।दोनों दलों के बीच तय हुआ है कि वह सीटे बांट ली जाएंगी और उसके ऊपर कोई भी हल्ला नहीं होगा