nirjala-ekadashi-2019
नई दिल्ली उमाशंकर त्रिपाठी गुरुवार 13 जून को निर्जला एकादशी मनाई जा रही है और आपको बता दें कि ज्योतिष माह के शुक्ल की एकादशी का महत्व काफी अधिक है इस एकादशी को निर्जला पांडव और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी इसको जाना जाता है और खास बात यह है कि इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए खास तौर पर एक व्रत रखा जाता है मान्यता यह भी है कि इस दिन के व्रत से साल भर की सभी एकादशी यू के बराबर का फल मिल जाता है
आप को बताए थे हैं की निर्जला एकादशी इसे क्यों कहा जाता है
इस खास तिथि के ऊपर निर्जल रहकर यानी बिना पानी पिए इस व्रत को किया जाता है इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है और खास बात यह है कि इस व्रत को रखने वाले सभी भक्तों पानी तक भी नहीं पीते और सुबह से लेकर शाम तक भगवान विष्णु जी की पूजा करते रहते हैं उनकी आराधना करते रहते हैं और उसके बाद अगले दिन द्वादशी तिथि के मौके पर पूजा पाठ और ब्राह्मणों को भोज भोजन करवाने के बाद वह खुद भोजन ग्रहण करते हैं
इस दिन का एक और खास महत्व है 18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण एकादशी माध्यम नाम का अध्याय है और अपने पाठकों को बता दें कि इसमें साल भर की सभी एकादशी ओं की जानकारी सबके लिए दी गई है और इस अध्याय में श्री कृष्ण जी ने युधिष्ठिर को एकादशी ओं का एक खास महत्व बताया निर्जला एकादशी के संबंध में पांडव पुत्र भी हमसे जुड़ी हुई एक बहुत ही प्रचलित कथा भी है
आपको यह भी बता दे कि वह महाभारत काल में भीम ने भी इस व्रत को रखा था महरिशी वेद व्यास पांडवों को चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाली एकादशी व्रत का संकल्प करवा रहे थे कि तब भीम ने वेदव्यास से कहा कि पितामाह, आपने एक माह में दो एकादशियों के उपवास की बात कही है। मैं एक दिन तो क्या, एक समय भी खाने के बिना नहीं रह सकता हूं। कहा कि मैं 1 दिन में कई बार भोजन करता हूं और इसीलिए मैं एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त नहीं कर सकता वेदव्यास जी ने भीम से कहा कि पूरे वर्ष में सिर्फ एक एकादशी ऐसी है जो विश्व भर की सभी एकादशी का पूर्ण आपको दिलवा सकती है वह एकादशी है जिस जेठ माह की शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी फिर तुम इस एकादशी का व्रत करो और यह सब सुनने के बाद भीम निर्जला एकादशी का व्रत करने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गए और इसीलिए इसे पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी से भी जाना जाता है

निर्जला एकादशी पर ने करना क्या है निर्जला एकादशी पर पानी के बिना व्रत रखने का एक बड़ा नियम है अगर आप यह संभव ना कर पाए तो इसलिए आप फलाहार और दूध का सेवन करके भी व्रत को रख सकते हैं सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प कीजिए अपने नाम और गोत्र बोलकर निर्जला एकादशी व्रत करने का एक पड़ा संकल्प करना चाहिए भगवान विष्णु की पूजा सुबह शाम करें भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन खिलाने के बाद दान करें इसके बाद आप भोजन कर सकते हैं
आपको यह भी बता दे की निर्जला एकादशी पर आपने क्या नहीं करना है तो इस बात को ध्यान से सुन लीजिए किस दिन तुलसी और बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए भगवान के भोग के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लेना चाहिए फिर तुलसी के गिरे हुए पत्तों को साफ जल से पूरी तरह से धोकर उन्हें उपयोग कर सकते हैं एकादशी पर चावल भूल कर भी आप ना खाएं घर में कलेश ना करें प्रेम से रहें जिन घरों के अंदर आ शांति होती है वहां देवी-देवताओं की कृपा बिल्कुल नहीं होती किसी भी अधार्मिक कामों से दूर रहें। एकादशी पर सुबह देर तक न सोएं। दिन में और शाम को भी नहीं सोना चाहिए।